Wednesday, February 2, 2011
गब्बर सिंह का चरित्र चित्रण
1. सादा जीवन, उच्च विचार: उसके जीने का ढंग बड़ा सरल था. पुराने और मैले कपड़े, बढ़ी हुई दाढ़ी, महीनों से जंग खाते दांत और पहाड़ों पर खानाबदोश जीवन. जैसे मध्यकालीन भारत का फकीर हो. जीवन में अपने लक्ष्य की ओर इतना समर्पित कि ऐशो-आराम और विलासिता के लिए एक पल की भी फुर्सत नहीं. और विचारों में उत्कृष्टता के क्या कहने! 'जो डर गया, सो मर गया' जैसे संवादों से उसने जीवन की क्षणभंगुरता पर प्रकाश डाला था.
२. दयालु प्रवृत्ति: ठाकुर ने उसे अपने हाथों से पकड़ा था. इसलिए उसने ठाकुर के सिर्फ हाथों को सज़ा दी. अगर वो चाहता तो गर्दन भी काट सकता था. पर उसके ममतापूर्ण और करुणामय ह्रदय ने उसे ऐसा करने से रोक दिया.
3. नृत्य-संगीत का शौकीन: 'महबूबा ओये महबूबा' गीत के समय उसके कलाकार ह्रदय का परिचय मिलता है. अन्य डाकुओं की तरह उसका ह्रदय शुष्क नहीं था. वह जीवन में नृत्य-संगीत एवंकला के महत्त्व को समझता था. बसन्ती को पकड़ने के बाद उसके मन का नृत्यप्रेमी फिर से जाग उठा था. उसने बसन्ती के अन्दर छुपी नर्तकी को एक पल में पहचान लिया था. गौरतलब यह कि कला के प्रति अपने प्रेम को अभिव्यक्त करने का वह कोई अवसर नहीं छोड़ता था.
4. अनुशासनप्रिय नायक: जब कालिया और उसके दोस्त अपने प्रोजेक्ट से नाकाम होकर लौटे तो उसने कतई ढीलाई नहीं बरती. अनुशासन के प्रति अपने अगाध समर्पण को दर्शाते हुए उसने उन्हें तुरंत सज़ा दी.
5. हास्य-रस का प्रेमी: उसमें गज़ब का सेन्स ऑफ ह्यूमर था. कालिया और उसके दो दोस्तों को मारने से पहले उसने उन तीनों को खूब हंसाया था. ताकि वो हंसते-हंसते दुनिया को अलविदा कह सकें. वह आधुनिक यु का 'लाफिंग बुद्धा' था.
6. नारी के प्रति सम्मान: बसन्ती जैसी सुन्दर नारी का अपहरण करने के बाद उसने उससे एक नृत्य का निवेदन किया. आज-कल का खलनायक होता तो शायद कुछ और करता.
7. भिक्षुक जीवन: उसने हिन्दू धर्म और महात्मा बुद्ध द्वारा दिखाए गए भिक्षुक जीवन के रास्ते को अपनाया था. रामपुर और अन्य गाँवों से उसे जो भी सूखा-कच्चा अनाज मिलता था, वो उसी से अपनी गुजर-बसर करता था. सोना, चांदी, बिरयानी या चिकन मलाई टिक्का की उसने कभी इच्छा ज़ाहिर नहीं की.
8. सामाजिक कार्य: डकैती के पेशे के अलावा वो छोटे बच्चों को सुलाने का भी काम करता था. सैकड़ों माताएं उसका नाम लेती थीं ताकि बच्चे बिना कलह किए सो जाएं. सरकार ने उसपर 50,000 रुपयों का इनाम घोषित कर रखा था. उस युग में 'कौन बनेगा करोड़पति' ना होने के बावजूद लोगों को रातों-रात अमीर बनाने का गब्बर का यह सच्चा प्रयास था.
9. महानायकों का निर्माता: अगर गब्बर नहीं होता तो जय और व??रू जैसे लुच्चे-लफंगे छोटी-मोटी चोरियां करते हुए स्वर्ग सिधार जाते. पर यह गब्बर के व्यक्तित्व का प्रताप था कि उन लफंगों में भी महानायक बनने की क्षमता जागी.
*ये रचना मेरी नहीं है | लेखक नाम मुझे पता नहीं |
11:33 PM by राहुल प्रताप सिंह राठौड़ · 3
Monday, January 17, 2011
लालू यादव पर राजू श्रीवास्तव का जबरदस्त जोक्स [विडियो] [जरूर देखें]
cropped with SnipSnip
*उद्देश्य सिर्फ कामेडी है |
6:36 AM by राहुल प्रताप सिंह राठौड़ · 1
Thursday, November 25, 2010
Reminder: Rahul Singh Rathore invited you to join Facebook...
| ||||||||||||
5:34 PM by राहुल प्रताप सिंह राठौड़ · 0
Wednesday, November 17, 2010
लतीफे
बेटी, " गैर हाजिरी के कारण"
पिता, "क्या तुम गणित की परीक्षा के दिन गैर हाजिर थीं?"
बेटी, "मैं नहीं,मेरे बगल में बैठने वाली लडकी गैर हाजिर थी |"
=====***=====****=====****=====****======****====
टीचर(स्टूडेंट से), "बतायो ये कौन सी चिड़िया है?"
स्टूडेंट, " मुझे पता नहीं"
टीचर, "तुम फेल हो गए | अपना नाम बतायो |"
स्टूडेंट, "आप भी मुझे देखकर, मेरा नाम पता कर लीजिए |"
=====***=====****=====****=====****======****====
6:14 PM by राहुल प्रताप सिंह राठौड़ · 0
Tuesday, November 16, 2010
ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो.....
भले छीन लो मुझसे USA का विसा
मगर मुझको लौटा दो वो कॉलेज का केन्टीन ,
वो चाय का पानी, वो तीखा समोसा..........
कडी धूप मे अपने घर से निकलना,
वो प्रोजेक्ट की खातीर शहर भर भटकना,
वो लेक्चर मे दोस्तों की प्रोक्सी लगाना,
वो सर को चीढाना ,वो एरोप्लेन उडाना,
वो सबमीशन की रातों को जागना जगाना,
वो ओरल्स की कहानी, वो प्रक्टीकल का किस्सा.....
बीमारी का कारण दे के टाईम बढाना,
वो दुसरों के Assignments को अपना बनाना,
वो सेमीनार के दिन पैरो का छटपटाना,
वो एक्साम में रातो को पसीना बहाना,
वो Exam के दिन का बेचैन माहौल,
पर वो मा का विश्वास - टीचर का भरोसा.....
वो पेडो के नीचे गप्पे लडाना,
वो रातों मे Assignments Sheets बनाना,
वो Exams के आखरी दिन Theater मे जाना,
वो भोले से फ़्रेशर्स को हमेशा सताना,
Without any reason, Common Off पे जाना,
टेस्ट के वक्त Table me मे किताबों को रखना,
ये डीग्री भी लेलो, ये नौकरी भी लेलो,
भले छीन लो मुझसे USA का विसा
मगर मुझको लौटा दो वो का केन्टीन,
वो चाय का पानी........
11:36 PM by राहुल प्रताप सिंह राठौड़ · 4
Monday, September 20, 2010
एक प्रेम-पत्र....[हंसी-मजाक]
साभार: http://comedy.rajiv.com/prem-patr.htm
Subject: Yeh Prem Patra Padhkar, Tum Naraz Na Hona...
Johnny Mera Naam
Piya Ka Ghar
Choukee No. 11
Teesri Manzil
China Town
Date: Nav Do Gyarah
My Dear ‘Anamica':
You must be surprised to receive this ‘Prem Patra' from me. Let me make my
‘Pahechan' to you as ‘Dilwale Dulhaniya Le Jayenge'. Though I am an
‘Awaara', I am also your ‘Deewana'.
I am making you a ‘Prarthna' to enter my ‘Zindagi' as a ‘Priyatama'. Even
though I do not have any ‘Sambandh' with you, I still consider you as my
‘Dream Girl' with ‘Lal Dupatta Malmal Ka'. There are only ‘Do Raaste' left
for me. One is to get your love by ‘Tyag' or to go the ‘Rangeela' way.
Wouldn't you like to be ‘Mere Jeevan Saathi' as you are ‘Lakhon Mein Ek'? I
also hope that you will ‘Guide' me in ‘Bahar' as we are made for ‘Ek Duje Ke
Liye'.
We will live in ‘Naya Zamana' where we will have a ‘Suhana Safar'. In this
‘Himalay Ki God Mein', our ‘Bandhan' is going to tied with ‘Preet Ki Dor'. I
hope that we will have nothing but ‘Anand' in ‘Ye Dillagi'.
Aren't you bored of ‘Akele Hum Akele Tum' life? Let this ‘Baazigar' be your
‘Boy Friend' and we start ‘Pehli Mohabbat'. This ‘Chahat' is going to lead
to a ‘Milan' where you are going to call me everyday for ‘Aao Pyar Karen'.
Now, ‘Phir Kab Miloge' as ‘Tumse Accha Kaun Hein'? As you know my love is
‘Himalay Se Uncha' and hopefully our ‘Mulakat' will be ‘An Evening in Paris'.
‘Aa Gale Lag Jaa'!
‘Hum Aapke Hain Koun...?'
-- Prem Pujaari
8:54 AM by राहुल प्रताप सिंह राठौड़ · 3


